What is FIR Full Form? FIR का मतलब क्या होता है? जानें FIR के बारे में सारी महत्त्वपूर्ण जानकारियां

FIR Full Form
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FIR Full Form 

दोस्तों हम अकसर किसी घटना के सम्बन्ध में या किसी आपराधिक कार्यवाही के सन्दर्भ में FIR (एफआईआर) का नाम सुनते ही है। आपने भी कभी ना कभी सुना ही होगा की किसी केस के सम्बन्ध में FIR दर्ज कर ली गयी है या पुलिस द्वारा सम्बंधित केस में अपराधी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गयी है। लेकिन ज्यादातर लोगों को इस बारे मे पता नही होता की FIR की फुल फॉर्म (FIR Full Form) क्या होती है? या फिर FIR का क्या मतलब होता है? 

Table of Contents

तो दोस्तों आज इस ऑर्टिकल के द्वारा हम आपको बताने वाले है की FIR की फुल फॉर्म (FIR Full Form) क्या होती है? FIR का मतलब क्या होता है? इसके अलावा इस आर्टिकल में हम आपको FIR के बारे में डिटेल मे जानकारी देंगे। इसी के साथ ही इस आर्टिकल मे हम आपको जीरो FIR और फोन या मोबाईल से FIR कैसे दर्ज करते हैं? इससे सम्बंधित जानकारी भी देंगे। FIR Full Form

FIR की Full Form क्या होती है? (FIR Full Form) 

तो दोस्तों आपको बता दें की FIR का Full Form होता है “First-Information Report” जिसे की हिंदी में “प्राथमिक सूचना रिपोर्ट” कहा जाता है। 

FIR Full Form – “First Information Report”

FIR Full Form in Hindi – फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट

हिन्दी में अर्थ : प्राथमिकी या प्रथम सूचना रिपोर्ट

FIR Full Form First Information Report

First Information Report (FIR) क्या होती है? 

FIR वैसे तो इस शब्द से आप सभी परिचित होंगे ही। जब भी हमारे जीवन में कोई भी समस्या आती है लोग तुरंत धमकी देते रहते हैं की मैं तुम्हारे खिलाफ FIR दर्ज कर दूंगा। FIR लिखवाने के कई कारण होते हैं एक तो जब कोई घटना घटती है तो FIR लिखवाया जाता है या फिर भविष्य में कोई दुर्घटना या किसी प्रकार की आशंका से बचने के लिए लोग FIR लिखवाते हैं जिससे उनके जीवन में सिक्योरिटी बनी रहे। FIR Full Form

FIR / First Information Report जैसा कि नाम से पता चलता है कि यह एक लिखित डॉक्यूमेंट होता है जिसके द्वारा पीड़ित (या पीड़ित की ओर से कोई व्यक्ति) पुलिस अधिकारी को अपराध के बारे में जानकारी देता है। अतः इस तरह हम कह सकते हैं की FIR एक लिखित डॉक्यूमेंट है जो पुलिस द्वारा तैयार किया जाता है। इसमें अपराध की डिटेल्स का वर्णन होता है। यह एक अनिवार्य कार्य होता है जो पुलिस द्वारा अपराध की जांच शुरू करने के पहले किया जाता है। FIR Full Form

F.I.R. First Information Report

जब कभी शिकायत करने वाला व्यक्ति थाने में पुलिस के पास शिकायत करता है तो पुलिस उस व्यक्ति से अपराध के बारे मे डिटेल मे जानकारी लेकर एक कागज पर लिखकर उस कागज पर थानाअध्यक्ष का हस्ताक्षतर करवाकर एक मोहर लगा देता है और शिकायतकर्ता को भी उसकी एक कॉपी दे देता है। इस पर थानाअध्यक्ष और शिकायतकर्ता का सिग्नेचर होता है। इसे ही FIR (First Information Report) कहा जाता है। FIR Full Form

FIR या फर्स्ट इन्फोर्मशन रिपोर्ट पुलिस द्वारा किसी भी आपराधिक घटना के सन्दर्भ में सूचना प्राप्त होने पर तैयार की जाने वाली रिपोर्ट है। किसी भी घटना के होने पर पीड़ित व्यक्ति के शिकायत देने पर पुलिस द्वारा सबसे पहले दर्ज की जाने वाली रिपोर्ट को ही FIR (First-Information Report) या प्राथमिक सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। FIR दर्ज होने के बाद ही सम्बंधित अपराध की जांच की जा सकती है। FIR Full Form

इसके बाद FIR नंबर को पुलिस अपने रजिस्टर में एंट्री करता है। जब पुलिस को लगता है की आपने उसको जो जानकारी प्रदान किया है वो सब सही है तो इसके बाद वह अपनी कार्यवाही शुरू करती है। FIR Full Form

यहाँ आपको बता दें की आप कई कारणों से एफआईआर दर्ज करवाते हैं जैसे – यदि आपस में कोई झगड़ा होता है तो, पड़ोस में किसी से झगड़ा होता है तो, कहीं कोई चोरी होती है तो, या भविष्य में किसी के धमकी आदि की आशंका होती है तो ऐसे स्थिति में लोग एफआईआर दर्ज करवाते हैं।

जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास त्वरित कार्यवाही हेतु शिकायत दर्ज करवाता है तो इसे ही ‘FIR’ कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति विशेष किसी प्रकार के अपराध का शिकार हो जाता है तो अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस के पास लिखित या मौखिक रूप से शिकायत दर्ज करवाता है तो इसे FIR कहा जाता है। FIR लिखित ज्यादा मान्य होता है ।

FIR सम्बंधित महत्वपूर्ण बिंदु

सरकार द्वारा नागरिको को न्याय प्रदान करने के लिये कानून व्यवस्था के अंतर्गत FIR की सुविधा प्रदान की गयी है। कोई भी नागरिक संविधान द्वारा प्रदत अधिकार का उपयोग करके किसी घटना के लिये FIR दर्ज करके न्याय प्राप्त कर सकता है। हर पुलिस स्टेशन में अपराध सम्बंधित सूचना दर्ज करने के लिये FIR रजिस्टर होता है जहाँ सभी शिकायतों को दर्ज किया जाता है। पीड़ित व्यक्ति द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर ही पुलिस FIR दर्ज करती है जिसमे अपराध की डिटेल्स होती है। नागरिको को FIR दर्ज करवाने सम्बंधित निम्न अधिकार दिये गये है :-

  • CRPC अर्थात दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 में FIR लिखने का प्रावधान दिया गया है। 

CRPC 1973

  • नागरिकों द्वारा पुलिस को मौखिक रूप से अपराध की जानकारी देने पर पुलिस के लिये इसे दर्ज करना आवश्यक है।
  • FIR दर्ज करवाने वाले नागरिक को यह अधिकार है की वह पुलिस द्वारा दर्ज की गयी FIR को पढ़ सकता है और इसके बाद ही अपनी सहमति दे सकता है।
  • पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद यह आवश्यक है की पुलिस द्वारा FIR की एक कॉपी पर नागरिक की सहमति के पश्चात उसके हस्ताक्षर भी लिये जायें जिससे की उसकी सहमति की पुष्टि की जा सके।
  • पीड़ित व्यक्ति को FIR की फोटोकॉपी मांगने का अधिकार भी दिया गया है। 
  • पुलिस को केवल FIR के आधार पर अपराधी को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है।
  • FIR पुलिस स्टेशन में उस अधिकारी द्वारा दर्ज की जाती है जो ड्यूटी पर मौजूद होता है। 
  • पुलिस की तरफ से FIR जांच का शुरुआती बिंदु है। बिना FIR के पुलिस जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं करती।
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 एक FIR में उल्लिखित मुख्य बातें हैं :-

  1. FIR की संख्या (FIR Number) 
  2. जगह और अपराध का समय
  3. FIR दर्ज करवाने वाले व्यक्ति का नाम
  4. अपराधी का नाम या विवरण
  5. शिकायतकर्ता का विवरण

FIR एप्लीकेशन लिखनें से सम्बंधित जानकारी

  • सबसे पहले आपको यह एप्लीकेशन उस पुलिस थानें में देना है, जिस थाना क्षेत्र के अन्दर घटना घटित हुई है। 
  • जिस पुलिस थाने में आप रिपोर्ट दर्ज कराना चाहते है, एप्लीकेशन में सबसे पहले उस थाने का पूरा पता लिखें। 
  • इसके बाद घटना का छोटा सा विवरण (आप जिस बारे में FIR लिखवाना चाहते हैं) विषय कॉलम में लिखें। 
  • इसके पश्चात एप्लीकेशन में अपना पूरा नाम, पता इत्यादि की जानकारी देते हुए अपने साथ हुई घटना का पूरा विवरण लिखें। 
  • जिस समय आपके साथ घटना घटित हुई है, उस समय और स्थान की डिटेल्स लिखें।
  • घटना घटित होने के समय यदि कोई व्यक्ति उपस्थित था, तो उसका नाम और उससे सम्बंधित विवरण लिखें। 
  • यदि आप अपराध करने वाले व्यक्ति से आप भलीभांति परिचित है, इसकी जानकारी एप्लीकेशन में अवश्य लिखें। 
  • यदि आपके पास घटना का कोई प्रमाण है जैसे कि ऑडियो या वीडियो अथवा अन्य किसी प्रकार के प्रमाण का उल्लेख एप्लीकेशन में करें। 
  • घटना में आपको क्या हानि हुई, उसकी डिटेल्स भी FIR में लिखें। 
  • घटना के दौरान यदि आपके साथ कोई व्यक्ति या साथी उपस्थित था, तो उसका विवरण भी एप्लीकेशन में अवश्य लिखें।
  • अपराध करने वाले व्यक्ति को यदि आप नहीं जानते है तो उसके पहनावा, कपड़े, रंग, बोलचाल की भाषा आदि का विवरण अवश्य दें। 
  • यदि आपके पास इसके आलावा भी कोई अन्य जानकारी है, तो उसका विवरण भी इस प्रार्थना पत्र में अवश्य शामिल करे, ताकि पुलिस अपराधी तक आसानी से पहुच सके। 
  • एप्लीकेशन या प्रार्थना पत्र के साथ अपने पहचान पत्र की फोटोकॉपी अवश्य attech करें। 
  • प्रार्थना पत्र के नीचे अपना हस्ताक्षर अवश्य करें। 

FIR दर्ज करने के नियम

FIR दर्ज करने के लिए यहाँ शिकायतकर्ता और पुलिस अधिकारी द्वारा FIR लिखने के कुछ नियम हैं जो यहाँ नीचे दिये गए हैं :-

  • यह आवश्यक नहीं है कि पीड़ित स्वयं अपराध की शिकायत करे। 
  • FIR किसी के भी द्वारा दर्ज कारवाई जा सकती है जो अपराध के बारे में जानता है। 
  • एक पुलिस अधिकारी को FIR दर्ज करने से इनकार करने का कोई अधिकार नहीं है। 
  • अगर पुलिस अधिकारी को अपराध के बारे में पता चलता है तो वे खुद भी FIR दर्ज कर सकते हैं। 

FIR (एफआईआर) दर्ज करने की प्रोसेस क्या है?

FIR दर्ज करवाने के लिए शिकायतकर्ता को नीचे दिए गए स्टेप को फॉलो करना होगा –

  • उस स्थान पर सबसे निकटतम पुलिस स्टेशन पर जाएं जहां अपराध हुआ था। 
  • आप मौखिक या लिखित दोनों तरीकों से जानकारी दे सकते हैं। अगर मौखिक शिकायत है तो पुलिस अधिकारी को इसे लिखित प्रारूप में बदल देना चाहिए। 
  •  FIR रिकॉर्ड बुक पर सारी जानकारी दर्ज करने के लिए पुलिस प्राधिकरण जिम्मेदार है। 
  • पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता को FIR की एक कॉपी देने के लिए जिम्मेदार है। 
  • पुलिस FIR को रिकॉर्ड पर डालते ही जांच शुरू करेगी। FIR Full Form

Zero FIR क्या होता है? 

ZERO FIR

आमतौर पर यह देखने में आता है कि अधिकतर थानाध्यक्ष या पुलिस चौकी में अधिकारी इसलिए भी रिपोर्ट लिखने से मना कर देते हैं, क्योंकि घटित हुआ अपराध उनके थाना क्षेत्र का नहीं है। ऐसे में आम व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं, कभी-कभी देर से शिकायत लिखने के कारण भी पीड़ित को इंसाफ नहीं मिल पाता है। आम व्यक्ति की इन्हीं कठिनाइयों को दूर करने के लिए जीरो एफआईआर का प्रावधान किया गया।

Zero FIR सामान्य एफआईआर की तरह ही होती है। हालांकि, इसका एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र की अड़चनें पैदा नहीं होती हैं। आमतौर पर, जब किसी भी थाने में पुलिस FIR तभी लिखती है, जब अपराध उसे थानाक्षेत्र के अंतर्गत हुआ हो। लेकिन जीरो एफआईआर में ऐसा नहीं होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति या उस व्यक्ति का कोई जानकार, रिश्तेदार या कोई चश्मदीद भी किसी भी थाने में FIR दर्ज करवा सकता है। इसे ही जीरो FIR कहा जाता है। FIR Full Form

जीरो एफआईआर के आधार पर पुलिस अपनी कार्यवाही या जांच शुरू कर देती है। बाद में, वह केस संबंधित क्षेत्र के थाने में ट्रांसफर करवा दिया जाता है। FIR Full Form

जीरो एफआईआर के फायदे

जीरो एफआईआर के कई फायदे हैं। जैसे-

  • बिना देरी किए पुलिस को घटना की जानकारी मिलना।
  • जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को एक्शन लेना ही पड़ता है, भले ही मामला उसके अधिकार क्षेत्र का ना हो।
  • समय पर कार्यवाही के जरिए कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों व सबूतों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है।
  • पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता। वह जहां पर भी है, वहीं से न्याय के लिए गुहार लगा सकता है।

किन स्थितियों में दर्ज की जाती है जीरो एफआईआर

आमतौर पर, अपराधों को दो श्रेणी में बांटा जाता है-कॉग्नीजेबल और नॉन-कॉग्नीजेबल। कॉग्नीजेबल अपराध बेहद ही संगीन होते हैं। इनमें रेप, हत्या, जानलेवा हमला आदि को शामिल किया जाता है। इस तरह के अपराधों की तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी होता है, ताकि जल्द से जल्द कार्यवाही शुरू की जा सके। इस तरह के मामलों की जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती हैं। जीरो एफआईआर अधिक रेप केस में दर्ज होती हैं, ताकि पीड़िता की तुरंत मेडिकल जांच की जा सके।

वहीं, नॉन-कॉग्नीजेबल अपराधों गंभीर अपराधों की श्रेणी में नहीं आते, जैसे मारपीट या लड़ाई-झगड़ा आदि। इस तरह के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है बल्कि इन्‍हें पहले मजिस्ट्रेट के पास रेफर कर दिया जाता है। जिसके बाद मजिस्ट्रेट समन जारी करता है और उसके बाद ही आगे की कार्रवाही शुरू होती है।

FIR दर्ज होने के बाद क्या कार्यवाही होती है? 

जब पीड़ित व्यक्ति द्वारा FIR दर्ज करवाया जाता है और पुलिस प्राथमिक रूप में FIR दर्ज कर देती है तो उसके बाद पुलिस कानूनी रूप से कार्यवाही करने के लिए बाध्य हो जाती है। 

FIR मामले के जांच शुरू करने से पहले का कदम होता है। इसके बाद पुलिस जांच के द्वारा घटना के बारे में निरीक्षण प्रारंभ करती है। मामले की छानबीन करती है, साक्ष्य बटोरती है, घटना से संबंधित सभी तरह के गवाहों से पूछताछ करती है, मामले का बयान दर्ज करके मुख्य घटना का फोरेंसिक चेक करने हेतु भेजती है। अब जब पुलिस के द्वारा परीक्षण पूरा हो जाता है तो चालान या आरोप पत्र (ऐसा पत्र जिसमें आरोपों का विवरण लिखा हो / चार्जशीट) तैयार करती है।

इन्हें भी देखें :-  What is ACF Full Form? ACF का मतलब क्या होता है? जानें ACF के बारे में जरूरी बातें…

 एक बार FIR दर्ज होने के बाद यह प्रक्रिया शुरू होती है :

  1. अगर यह ज़ीरो एफआईआर नहीं है तो पुलिस अथॉरिटी तुरंत जांच शुरू कर देगी। 
  2. अगर मामला जांच करने लायक है तो पुलिस उसका विश्लेषण करेगी। अगर यह सिर्फ कुछ रुपए या कोई बड़ा मामला नहीं है, तो पुलिस जांच की प्रक्रिया नहीं करती है।
  3. पुलिस FIR को मजिस्ट्रेट के पास भेजती है और अपराध की समीक्षा करके उन्हें रिपोर्ट करती है। 
  4. इसके बाद मजिस्ट्रेट FIR से संबंधित एक और जांच का आदेश देता है
  5. जांच प्रक्रिया में जो भी व्यक्ति बयान देता है, उसे रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है। 
  6. यदि न्यायाधीश अंतिम जांच रिपोर्ट से संतुष्ट हैं तो वे अपनी आज्ञा या आदेश जारी कर सकते हैं। 

क्या करें अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना करे तो?

किसी भी मामले या अपराध के सम्बन्ध में FIR दर्ज करवाना संवैधानिक कानून द्वारा नागरिकों का अधिकार है इसलिए किसी पुलिस अधिकारी को FIR दर्ज करने से इनकार करने का अधिकार नहीं है।

लेकिन अगर किसी मामले में, कोई पुलिस अधिकारी तर्कहीन कारण पर FIR दर्ज करने से इनकार कर देता है, तो आप इसकी शिकायत उच्च रैंक वाले पुलिस अधिकारी से कर सकते हैं।

अगर उस पुलिस प्राधिकरण ने भी इसे खारिज कर दिया तो आप न्यायिक अधिकारी को अपनी प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं। यदि न्यायिक अधिकारी इसे महत्वपूर्ण पाते हैं तो आपकी शिकायत के आधार पर, न्यायिक अधिकारी पुलिस को आपकी FIR दर्ज करने का आदेश देगा।

अगर पुलिस अधिकारियों द्वारा FIR दर्ज करने से इंकार करने पर सजा की बात करें तो FIR दर्ज करने से इनकार करने पर पुलिस अधिकारियों को 1 साल की कैद हो सकती है।

FIR (एफआईआर) के बारे में कुछ रोचक तथ्य?

  • जब FIR का आकलन करने की बात आती है तो इसका विश्लेषण और आलोचना करने के लिए सामान्य ज्ञान की आवश्यकता है।
  • यदि सूचित अपराधी या वह अपराधी जो FIR में प्रस्तावित है, वह एक सार्वजनिक व्यक्ति है जैसे – सेलिब्रिटी, लोक सेवक, राजनेता, आदि। तो पहले वे प्रारंभिक जांच से गुजरेंगे।
  • एफआईआर कहानी या कथानक प्रारूप में लिखने के लिए नहीं है, FIR यह दर्शाने के लिए है की घटना कैसे हुई। 

स्मार्ट मोबाईल फोन से FIR कैसे दर्ज करवाते हैं?

दोस्तों अब आप अपने स्मार्टफोन / मोबाईल से भी FIR दर्ज करवा सकते हैं। पहले के समय पुलिस को रिपोर्ट करने के लिए पुलिस स्टेशन जाना जरुरी था लेकिन अब आप छोटी मोटी घटनाओं की FIR ऑनलाइन बिना थाने जाए घर बैठे रजिस्टर करवा सकते हैं। 

लेकिन दोस्तों अपने स्मार्टफोन / मोबाईल से ऑनलाइन दर्ज कराई जाने वाली FIR किसी विशेष व्यक्ति के नाम से नहीं दर्ज की जा सकती है, मतलब इस एफआईआर को केवल अज्ञात लोगो के विरुद्ध ही दर्ज कराई जा सकती है।

लेकिन इसमे आप किसी बड़ी घटना की FIR Online नही दर्ज करा सकते इसमे सिर्फ आप छोटी आपराधिक घटना की जानकारी पुलिस को ऑनलाइन FIR से दे सकते हैं। इसके जरिए आपके साथ कोई छोटी मोटी घटना जैसे मोबाइल चोरी होना, लैपटॉप, कार, बाइक, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड जैसी चीजों के चोरी होने की या खोने की घटनाओं का शिकायत ऑनलाइन FIR के जरिए दर्ज करा सकते हैं। 

चलिए जानते हैं की आप कैसे घर बैठे Online FIR दर्ज करवा सकते हैं ।

Online FIR कैसे दर्ज करवाएं? 

इसके लिए सबसे पहले आपको अपने राज्य के पुलिस की वेबसाइट में जाना होगा। सभी राज्यों की पुलिस की वेबसाइट अलग अलग है अपने राज्य के पुलिस की वेबसाइट आप गूगल की मदद से पता कर सकते हैं जैसे भारत के कुछ स्टेट के पुलिस की वेबसाइट नीचे दी गयी हैं।

Online FIR for MP State Police – https://www.mppolice.gov.in/en

Online FIR In UP – https://cctnsup.gov.in/eFIR/login.aspx

Online FIR in Delhi – https://delhipolice.gov.in/

FIR Online Haryana – https://haryanapolice.gov.in/

Online FIR Rajasthan – https://police.rajasthan.gov.in/

Online FIR Bihar – https://scrb.bihar.gov.in/view_fir.aspx

इन वेबसाइट के जरिये Online FIR रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए आपके पास Email ID और मोबाइल नंबर होना आवश्यक है। क्योंकि सबसे पहले आपको इन वेबसाइट में अपना अकाउंट बनाना होगा जिसके लिए मोबाइल नंबर और Email ID की जरुरत पड़ेगी। 

आपकी जानकारी के लिए हम उत्तर प्रदेश में Online FIR रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस बता रहे है। अत: यह सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए ही मान्य होगा। इसके साथ ही आप अपने राज्य अनुसार वेबसाइट का चुनाव करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते है। 

Online e-FIR दर्ज करवाने की प्रोसेस 

Online e-FIR दर्ज कराने के लिए आपको सबसे पहले आपको यूपी पुलिस के ऑनलाइन FIR के पोर्टल CCTNS (Crime & Criminal Tracking Network & System) (https://cctnsup.gov.in/CitizenPortal/SignUp.aspx?Mode=Q3JlYXRl&Source=eFIR) पर विजिट करके ऑनलाइन अकाउंट बनाना होगा, जिसके बाद आपके पास यूजर आईडी व पासवर्ड आ जाएगा। 

अब उन जानकारी के आधार पर लॉग इन करे और फिर आपके सामने वेबसाइट का पेज खुलकर आएगा, जिस पर आपको तीन ऑप्शन दिखाई देंगे। 

  • Existing User
  • New User
  • Authenticate Submitted Report

इसके बाद नयी रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आपको New User पर क्लिक करना होगा, फिर जैसे ही आप इस पर क्लिक करेंगे, तो उसी समय आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जायेगा, यहाँ पर आपसे नाम, ईमेल और फ़ोन नंबर की जानकारी मांगी जाएगी, यहाँ आप सारी जानकारी बिल्कुल सही से भरें क्योंकी यहाँ दी गई जानकारी में आगे कोई भी परिवर्तन नहीं हो सकता है। 

अपना नाम, ईमेल और फ़ोन नंबर भरने के बाद आपके मोबाइल नंबर पर एक वेरिफिकेशन कोड (OTP) आएगा, और वही कोड आपकी Email ID पर भी भेजा जायेगा, आपको इस कोड की आवश्यकता फाइनल सबमिट के समय होती है। 

इसके बाद आप Register पर क्लिक कर दें , इस पर क्लिक करते ही आपके सामने एक नया पेज खुलकर आ जाएगा, जिसमे आपका नाम, ईमेल और फ़ोन नंबर पहले से ही भरा हुआ होगा। 

 इस पेज पर आपकी पर्सनल जानकारी मांगी जाएगी जैसे- पिता का नाम, पता, और घटना की विस्तृत जानकारी का एक कॉलम दिखाई देगा, जहां पर आपके साथ क्या हुआ उसकी पूरी जानकारी भरनी होती है, लेकिन इसके लिए आपको यहाँ पर  केवल अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करना होगा क्योंकि, इसमें अन्य भाषा इसमें सपोर्ट नहीं करती है, सही से जानकारी देने के बाद आपको Next बटन पर क्लिक करना होगा। 

फिर आप के सामने एक नया पेज खुलकर आएगा। इसमें आप से घटना के बारे में पूरी डिटेल प्राप्त की जाएगी, जैसे – यदि आपका मोबाइल खोया है, तो आपको उसका मोबाइल सिम नंबर, मोबाइल की कम्पनी का नाम एवं मॉडल नंबर, मोबाइल का IMEI नंबर और आपके मोबाइल का विवरण भी नीचे कॉलम में लिख सकते है, सही जानकारी भरने के बाद आप NEXT पर क्लिक कर दें। 

NEXT पर क्लिक करते ही आप के सामने एक विंडो ओपन होकर आ जाएगी, जिसमे आप से वेरिफिकेशन कोड पूछा जायेगा, आप अपने मोबाइल के SMS से देख कर कोड डाल दें या फिर ईमेल से देख कर, कोड डाल दें। 

इन्हें भी देखें :-  What is CVLKRA Full Form? CVLKRA का Full Form क्या होता है? जानें CVL KRA क्या है?

इसके बाद कोड डालते ही आपकी रिपोर्ट सबमिट हो जाएगी और आपकी ईमेल पर इसकी एक कॉपी तुरंत ही भेज दी जाएगी, जिसका आप प्रिंट निकाल सकते है और उसका कहीं भी प्रयोग कर सकते है, इसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर सफलतापूर्वक रिपोर्ट का एसएमएस भी भेज दिया जाएगा। आप अपनी रिपोर्ट का प्रिंट Authenticate Submitted Report जा कर भी प्राप्त कर सकते है। 

इसी तरह आप मोबाइल मे UPCOP Mobile App से भी e-FIR दर्ज करवा सकते हैं। 

UPCOP Mobile App से e-FIR कैसे रजिस्टर्ड करे ?

  • इसके लिए सबसे पहले UPCOP Mobile App डाउनलोड करने के लिए आपको गूगल प्ले स्टोर पर विजिट करना होगा। 
  • गूगल प्ले स्टोर पर सर्च करे “UPCOP”, यहाँ आपको UPCOP मोबाइल एप का आइकॉन दिखाई देगा। इस एप्लीकेशन इनस्टॉल करे। 
  • एप्लीकेशन इनस्टॉल हो जाने के बाद, आप अपना यूजर अकाउंट ऐसे ही बना सकते है जैसे ऊपर पोर्टल मे ID बनाने की प्रोसेस दी हुई है।
  • UPCOP Mobile App पर अकाउंट बनाने के बाद लॉग इन करे व किस प्रकार की शिकायत दर्ज करनी है इसे सेलेक्ट करे। 
  • सेलेक्ट करने के बाद समस्त जानकारी सही प्रकार से भरे व कंप्लेंट सबमिट कर दे। 

आपकी ऑनलाइन FIR दर्ज हो जायेगी। 

ऑनलाइन FIR कैसे चेक करें?

यदि आप ऑनलाइन FIR दर्ज करवा चुके है और आप अपनी शिकायत पर क्या कार्यवाही हुई या आपकी FIR का Status क्या है? तो आप इसे भी बेहद आसानी से चैक कर सकते है। Online FIR का स्टेटस चैक करने के लिए आप निम्न स्टेप्स को फॉलो करे :-

  • अपने UP Police e-FIR Portal यानी CCTNS (Crime & Criminal Tracking Network & System) (https://cctnsup.gov.in/CitizenPortal/SignUp.aspx?Mode=Q3JlYXRl&Source=eFIR) पर विजिट करें और अपनी रजिस्टर ईमेल आईडी और पासवर्ड डालकर Login करें। 
  • जैसे ही आप Login करेगे तो आपको ‘एफआईआर की स्थिति देखे’ आप्शन दिखाई देगा। 
  • इस आप्शन पर क्लिक करें और अपनी Complaint Number नम्बर दर्ज करे। 
  • Registered Complaint Number डालने पर आपके FIR की वर्तमान स्थिति दिखाई देने लगेगी।
  • आप ऑनलाइन FIR कॉपी का प्रिंट-आउट भी यही से ले सकते है। 

FAQ About FIR Full Form?

Q. FIR का मतलब क्या होता है?

Ans : किसी (आपराधिक) घटना के संबंध में पुलिस के पास कार्यवाई के लिए दर्ज की गई सूचना को First Information Report (FIR) कहा जाता है।

Q. FIR कब होती है? / FIR कब लिखवाई जाती है?

Ans : जब भी कहीं किसी व्यक्ति के साथ कोई घटना या दुर्घटना होती है तो वह सबसे पहले पुलिस स्टेशन जाकर रिपोर्ट करता है। जिसे FIR कहा जाता है। यह एक लिखित दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर पुलिस एक्शन लेती है।

Q. FIR कौन लिख सकता है?

Ans : यह आवश्यक नहीं है कि पीड़ित स्वयं अपराध की शिकायत करे। FIR किसी के भी द्वारा दर्ज कारवाई जा सकती है जो अपराध के बारे में जानता है। इसके अलावा अगर पुलिस अधिकारी को अपराध के बारे में पता चलता है तो वे खुद भी FIR दर्ज कर सकते हैं।

Q. FIR कहां और कब दर्ज किया जाता है?

Ans : FIR आम तौर पर उस पुलिस स्टेशन में दर्ज की जाती है जिसके अधिकार क्षेत्र में अपराध होता है। FIR लिखवाने के कई कारण होते हैं एक तो जब कोई घटना घटती है तो FIR लिखवाया जाता है या फिर भविष्य में कोई दुर्घटना या किसी प्रकार की आशंका से बचने के लिए लोग FIR लिखवाते हैं जिससे उनके जीवन में सिक्योरिटी बनी रहे।

Q. FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है?

Ans : जब पीड़ित व्यक्ति द्वारा FIR दर्ज करवाया जाता है और पुलिस प्राथमिक रूप में FIR दर्ज कर देती है तो उसके बाद पुलिस कानूनी रूप से कार्यवाही करने के लिए बाध्य हो जाती है। 

FIR मामले के जांच शुरू करने से पहले का कदम होता है। इसके बाद पुलिस जांच के द्वारा घटना के बारे में निरीक्षण प्रारंभ करती है। मामले की छानबीन करती है, साक्ष्य बटोरती है, घटना से संबंधित सभी तरह के गवाहों से पूछताछ करती है, मामले का बयान दर्ज करके मुख्य घटना का फोरेंसिक चेक करने हेतु भेजती है। अब जब पुलिस के द्वारा परीक्षण पूरा हो जाता है तो चालान या आरोप पत्र (ऐसा पत्र जिसमें आरोपों का विवरण लिखा हो / चार्जशीट) तैयार करती

है।

Q. FIR और चार्जशीट में क्या अंतर है?

Ans : FIR थाने पर लिखाई जाने वाली रिपोर्ट है, जो कोई व्यक्ति किसी अपराध के संबंध में लिखवाता है । जिसे प्रथम सूचना रिपोर्ट या फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट भी कहते हैं। जबकि चार्जशीट या आरोप पत्र पुलिस द्वारा इन्वेस्टिगेशन के उपरांत आरोप साबित हो जाने पर न्यायालय प्रेषित किया जाता है, जिस पर न्यायालय द्वारा संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू किया जाता है।

Q. FIR और मुकदमे में क्या अंतर है?

Ans : जब किसी आपराधिक घटना की सूचना पुलिस स्टेशन में मिलती हैं और उसकी सूचना पुलिस धारा 154 सीआरपीसी के तहत पुलिस हस्तक्षेप योग्य अपराध के रूप में रजिस्टर्ड करती हैं तो इसे FIR कहा जाता हैं और पुलिस जब उस आपराधिक प्रकरण की इन्वेस्टिगेशन कम्प्लीट करके कोर्ट में केस पेश करती हैं तो ये मुकदमा बन जाता हैं।

Q. FIR रद्द कैसे होती है?

Ans : यदि अदालत को यह विश्वास हो जाता है कि व्यक्ति निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है तो उस स्थिति मे अदालत द्वारा FIR को रद्द किया जा सकता है। एक उच्च न्यायालय FIR को इस आधार पर रद्द कर सकता है कि मामला एक झूठा मामला है और पुलिस से पीड़ित व्यक्ति को गिरफ्तार होने पर मुक्त करने के लिए कहेगा।

Q क्या FIR वापस लिया जा सकता है?

Ans : FIR वापस भी ली जा सकती है, बशर्ते पुलिस ने FIR पर चार्जशीट तैयार करके उसे कोर्ट में दाखिल ना किया हो। FIR वापस लेने के लिए पीड़ित व्यक्ति को संबंधित थाना प्रभारी को एक प्रार्थनापत्र देना होता है। अगर पुलिस FIR वापस करने से मना कर देती है तो पीड़ित व्यक्ति कोर्ट के जरिए इसे वापस ले सकता है।

Q. अगर कोई झूठी FIR दर्ज करे तो क्या करना चाहिए?

Ans : यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ जानबूझकर झूठी FIR दर्ज की गई हो, तो संविधान के अनुच्छेद 216 के तहत एक रिट याचिका दायर कर FIR रद्द करने का आवेदन हाईकोर्ट में किया जा सकता है। हाई कोर्ट को बेगुनाही के सबूत सही लगे तो FIR रद्द किया जा सकता है।

तो दोस्तों यहाँ इस आर्टिकल मे हमने आपको  FIR की Full Form (FIR Full Form) और FIR के बारे में और बहुत सी जानकारी दी है। और इसके अलावा इसी आर्टिकल मे हमने आपको जीरो FIR क्या है? और ऑनलाइन घर बैठे मोबाइल से FIR कैसे दर्ज कराए? इस बारे मे भी जानकारी दी है। 

उम्मीद है इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको FIR की फ़ुल फॉर्म (FIR Full Form) और जीरो FIR क्या है? और ऑनलाइन घर बैठे मोबाइल से FIR कैसे दर्ज कराए? के बारे में जानकारी मिल गयी होगी। और आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। 

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